दिन के अँधेरे में
रात के उजाले में
चाँद के उजाले में
सूरज के चांदने में
मैं लटका हुआ हूँ पेड़ के ऊपर
इन उनींदी आँखों में
सब लगता है
उल्टा पुल्टा
आँखे बंद करने से लगता है
डर लगता हैं
कहीं ये दुनिया
बदल ना ले
अपने रंग .

बस देखती है उसको हर वक़्त की वो यहीं कहीं तो नहीं
पास हो कर भी वो इतना दूर है जानो वो कभी था ही नहीं
पर जानता वो भी है की मैं भी हूँ उसका