Saturday, 16 August 2008

आज फिर तेरी याद

आज फिर तेरी याद है आई
सपने मेरे तेरे साथ है लायी
तू मेरे साथ ना सही
हाथों में हाथ ना सही
तेरी यादें तौ हैं
तेरी बातें तौ हैं

इन आँखों में बस तू है बसी
जान ये मेरी तेरे नाम है लिखी
तू मेरे साथ ना सही
तेरी यादें तौ है
तेरी बातें तौ हैं

भूल ना पाऊं तेरी बातें सभी
तू ही धड्खन तू ही दिल की लगी
तू मेरे साथ न सही
हाथों में हाथ ना सही तेरी
यादें तौ हैं
तेरी बातें तौ हैं
तेरी बातें तौ हैं
आज फिर तेरी यादें हैं आई ।

ज़िन्दगी क्या है

मुझे समझ नही आता क्या है ज़िन्दगी
आखिर क्यूँ
इस सवाल का जवाब क्या चाहिये मुझे
मैं समझना नही चाहता
इस जीवन की उलझों को
मैं तौ जीना चाहता हूँ एक आसा सी जींदगी
मुझे नही पता कब होगा ऐसा पर
एक दिन तौ आयेगा ऐसा
जब सब कुछ होगा आसान
इन जीवन की सचआयिओं को मैं भी जानूंगा ।

Thursday, 22 May 2008

दुनिया की ......


दुनिया की ऐसी की तैसी ।
अब नही हैं डर
बोले कोई भी कुछ भी ।
पागल था मैं
जो आज  तक सुनता रहा
उन लोगों की बातें ।
अब नही है कोई मुश्किल
अब बस मैं ही मैं हूँ ।
बहुत हो गया हम
मैं भी तो कुछ हूँ
मैं भी बहुत कुछ है ।
दुनिया की तो ......

Sunday, 18 May 2008

ज़िंदगी ..........


ज़िंदगी बहुत अजीब है
है ना
सच में
मेरे लिए ज़िंदगी आसान थी
शायद ज़िंदगी अब उतनी ही मुश्किल हो गई है
आज का दिन बहुत अजीब था
शायद मेरा अपना बहम
शायद डर
पता नही क्यों
मैं कौन हूँ
क्यों धोखा दे रहा हूँ
अपने आप को
मेरी ज़िंदगी में कुछ है क्या
समझ नही आता
आज रोया हूँ मैं
क्यों रोया हूँ मैं
उस से बात की है
आज मैंने
अपने दिल
का हाल
आखिर उसी को क्यों बताया है मैंने अपने दिल का हाल
शायद
मैं उस से अभी भी प्यार करता हूँ ।
वो सच में मेरी दोस्त हैं आज लगता है
आज लगता है
बहुत ग़लतियाँ की है मैंने
इस छोटी सी  दुनिया  में  शायद  मैं
कहीं  खो  गया  हूँ
मैं मैं नही हूँ
मैं शायद
नही मुझे नही पता मैं क्या कर रहा हूँ
चलो जाने दो
मुझे भी नही पता की मैं क्या लिख रहा हूँ ।

Tuesday, 6 May 2008

मैं

अल्लाह
क्यों हूँ मैं यहाँ समझ नही आता
क्यों नही समझा जाता
क्या वो गलत नहीं हैं
क्या कमी मुझ मे ही हैं
मैं नहीं जानता
अल्लाह

Monday, 24 December 2007

रात इधर ढलती तो दिन उधर निकलता है
कोई यहाँ रुकता तो कोई वहां चलता है
दीप ऊ पतंगे में सिर्फ इतना है
एक जलके बुझता है,एक बुझ्के जलता है
जहाँ मैं हूँ वहां उम्मीद पेहम टूट जाती है
जवानी हाथ मल-मलकर वहां आंसू बहती है
चमन है,फूल है,कल्लियाँ है.खुशबू भी है रंगत भी
मगर आकार वहां बुलबुल तराने भूल जाती हैं